Yugendra Bhonsle
Yugendra

On this planet to experience human life.

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My shayari's

Poetry
सोचा इस अकेलेपन को उसीके साथ बाँट लूं, उसमे भी न जाने क्यों, वो मुझे अकेला छोड़ गई।
- योगेंद्र भोंसले

आजकल थका देता हूँ खुद के शरीर को इस कदर, 'ऐसा क्यों हुआ - वैसा क्यों हुआ' खुद से ये पूछने की भी ताकत नहीं बचती।
- योगेंद्र भोंसले

उनकी आंखों में खुद का चेहरा ढूंढ़ना चाहा, सिर्फ ढेर सारे सपनों को देख पाया।
- योगेंद्र भोंसले

कर ले यार, जो कुछ तुझे करना है, एक दिन तो तुझको भी मरना है, मुझको भी मरना है।
- योगेंद्र भोंसले

प्यासा हूं, जरूरत है पानी की, यूहीं अकेले रोता तड़पता रहा, खुदके आंसुओं से जब प्यास बुझी, तब पानी लेकर वो फरमाएं।
- योगेंद्र भोंसले

देख ना यार, तेरा प्यार तेरे सामने खड़ा है, खैर गलती उसकी भी नहीं, काफी रिश्ते संभालने है उसे।
- योगेंद्र भोंसले
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